22 june 2026
देहरादून। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून ने करीब 25 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले का खुलासा करते हुए अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के दो सदस्यों को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 13 एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बैंक खातों से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है।
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने बताया कि देहरादून निवासी एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि अज्ञात साइबर अपराधियों ने उसका मोबाइल फोन हैक कर लिया। इसके बाद उसके मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी में बदलाव कर कंपनी के बैंक खाते तक पहुंच बनाई गई और खाते से लगभग 24.95 लाख रुपये की रकम निकाल ली गई।
शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान बैंक खातों के लेनदेन, मोबाइल नंबरों, डिजिटल ट्रांजेक्शन और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया। जांच में मिले महत्वपूर्ण सुरागों के आधार पर पुलिस टीम को पश्चिम बंगाल भेजा गया।
18 जून को एसटीएफ की टीम ने पश्चिम बंगाल के रानाघाट क्षेत्र में दबिश देकर तपन बिस्वास (45 वर्ष) और उत्तम कुमार दास (38 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे साइबर अपराधियों को बैंक खाते, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड उपलब्ध कराने का काम करते थे। इसके बदले उन्हें आर्थिक लाभ मिलता था।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी विभिन्न लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनकी बैंकिंग जानकारी साइबर ठगों तक पहुंचाते थे। पुलिस के अनुसार तपन बिस्वास साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों के संचालन और प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। वहीं उत्तम कुमार दास के बैंक खाते में ठगी की रकम दूसरी परत (सेकेंड लेयर) में ट्रांसफर किए जाने के साक्ष्य मिले हैं।
पुलिस का मानना है कि गिरफ्तार आरोपी एक बड़े साइबर नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो देश के विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम देता है। एसटीएफ अब इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है और मामले में आगे की जांच जारी है।
उत्तराखंड एसटीएफ ने आम जनता से अपील की है कि मोबाइल फोन, ई-मेल और बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन या स्थानीय पुलिस को दें, ताकि साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

