20 june 2026
लैंसडौन (पौड़ी)। गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर में आयोजित एक भव्य पासिंग आउट परेड के साथ 258 अग्निवीर भारतीय थल सेना का हिस्सा बन गए। 24 सप्ताह के कठोर सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद इन जवानों ने देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा की रक्षा करने की शपथ ली। परेड समारोह ने न केवल प्रशिक्षण की सफलता का उत्सव मनाया, बल्कि युवा सैनिकों के जीवन में एक नए अध्याय की शुरुआत भी की।
भवानी दत्त परेड ग्राउंड में आयोजित इस समारोह में अनुशासन, समर्पण और सैन्य परंपराओं की शानदार झलक देखने को मिली। प्रशिक्षित अग्निवीरों ने कदमताल करते हुए अपनी दक्षता और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया। परेड की सलामी परेड कमांडर एवं वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी ने ली।
कठिन प्रशिक्षण के बाद सेना में मिली जिम्मेदारी
अग्निवीरों ने पिछले 24 सप्ताह के दौरान शारीरिक क्षमता, हथियार संचालन, सामरिक कौशल, नेतृत्व क्षमता और सैन्य अनुशासन से जुड़े विभिन्न प्रशिक्षण चरणों को पूरा किया। कठिन परिस्थितियों में खुद को साबित करने के बाद इन युवाओं को भारतीय सेना की जिम्मेदारी सौंपी गई।
ब्रिगेडियर विनोद सिंह नेगी ने अपने संबोधन में कहा कि सेना में शामिल होना केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च अवसर है। उन्होंने नवसैनिकों से अपेक्षा जताई कि वे गढ़वाल राइफल्स की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए अपने कर्तव्यों का ईमानदारी और निष्ठा के साथ निर्वहन करेंगे।
रेजिमेंट की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि गढ़वाल राइफल्स का इतिहास वीरता, बलिदान और उत्कृष्ट सैन्य उपलब्धियों से भरा हुआ है। ऐसे में नए अग्निवीरों की जिम्मेदारी है कि वे रेजिमेंट की प्रतिष्ठा को और ऊंचाइयों तक पहुंचाएं। उन्होंने जवानों को हर परिस्थिति में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की सीख दी।
परिवारों के लिए भी गर्व का अवसर
परेड समारोह युवा सैनिकों के साथ-साथ उनके परिवारों के लिए भी भावुक और गौरवपूर्ण क्षण साबित हुआ। लंबे प्रशिक्षण के बाद सेना की वर्दी में अपने बेटों को देखकर परिजनों के चेहरे गर्व से खिल उठे। समारोह के दौरान सैन्य परंपराओं और अनुशासन का विशेष प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा।
राष्ट्रसेवा के नए अध्याय की शुरुआत
परेड के समापन के साथ ही 258 अग्निवीरों का प्रशिक्षणार्थी जीवन समाप्त हुआ और वे भारतीय सेना के सक्रिय सदस्य बन गए। अब ये जवान देश की सीमाओं और सुरक्षा संबंधी विभिन्न जिम्मेदारियों के लिए तैयार हैं। देशभक्ति, अनुशासन और समर्पण की भावना के साथ इन युवा सैनिकों ने राष्ट्रसेवा के अपने नए सफर की शुरुआत की है।

