16 june 2016
देहरादून। उत्तराखंड में टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को लेकर चल रहे विवाद और शिक्षकों की बढ़ती चिंताओं के बीच राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस संवेदनशील विषय पर शिक्षकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ठोस और संतुलित निर्णय लेगी। इसके लिए देश के विभिन्न राज्यों में लागू व्यवस्थाओं और वहां लिए गए फैसलों का भी गहन अध्ययन किया जाएगा, ताकि उत्तराखंड के लिए व्यवहारिक और न्यायसंगत समाधान निकाला जा सके।
डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश के हजारों शिक्षक इस मुद्दे से सीधे तौर पर जुड़े हैं, इसलिए सरकार किसी भी निर्णय से पहले सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना और शिक्षकों के हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से अन्य राज्यों की नीतियों और न्यायिक फैसलों का अध्ययन कराया जाएगा।
उधर, टीईटी अनिवार्यता को लेकर प्राथमिक शिक्षकों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने नई शर्तें लागू करने से उनके भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। शिक्षकों का मानना है कि सरकार को उनकी सेवा अवधि, अनुभव और वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए।
इसी मुद्दे को लेकर प्रदेशभर के प्राथमिक शिक्षक 22 जून को देहरादून में सचिवालय कूच करेंगे। विभिन्न शिक्षक संगठनों ने इस कार्यक्रम की तैयारियां तेज कर दी हैं और बड़ी संख्या में शिक्षकों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। आंदोलन के माध्यम से शिक्षक सरकार तक अपनी मांगों और समस्याओं को मजबूती से पहुंचाना चाहते हैं।
शिक्षक नेताओं का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है। वहीं सरकार की ओर से लगातार संवाद और समाधान का भरोसा दिया जा रहा है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के बयान के बाद शिक्षकों को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही ऐसा निर्णय लेगी जो शिक्षकों के हितों के साथ-साथ प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।
अब 22 जून को प्रस्तावित सचिवालय कूच और उसके बाद सरकार की आगामी रणनीति पर सभी की निगाहें टिकी हैं। माना जा रहा है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में शिक्षा विभाग और शिक्षक संगठनों के बीच चर्चा का प्रमुख विषय बना रहेगा।

