15 june 2026
हरिद्वार। धार्मिक नगरी हरिद्वार एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन की साक्षी बनने जा रही है। 17 जून को यहां विश्व के सबसे बड़े पारद शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। विशेष बात यह है कि इस विशाल पारद ध्यान लिंगम के निर्माण में लगभग 10 वर्षों का समय लगा है और इसे प्राचीन रसायन शास्त्र, नाथ योग परंपरा तथा आधुनिक अनुसंधान के समन्वय से तैयार किया गया है।
यह अद्वितीय पारद शिवलिंग लगभग 5210 किलोग्राम वजन का है, जिसमें 3333 किलोग्राम शुद्ध पारे का उपयोग किया गया है। शिवलिंग की ऊंचाई करीब 4.5 फीट तथा गोलाई लगभग 1.5 फीट बताई गई है। इसे हरिद्वार-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर भादराबाद टोल प्लाजा के समीप स्थित श्री साई शिव गंगा धाम परिसर में स्थापित किया गया है, जहां श्रद्धालु इसके दर्शन कर सकेंगे।
दशकभर की साधना और शोध का परिणाम
पारद ध्यान लिंगम का निर्माण ध्यान गुरु रघुनाथ येमूल गुरुजी के मार्गदर्शन में किया गया है। गुरुजी के अनुसार इस परियोजना के पीछे वर्षों की साधना, शोध और अथक परिश्रम जुड़ा हुआ है। गिरनार क्षेत्र में 12 वर्षों की तपस्या के बाद उन्होंने योग, ध्यान और आध्यात्मिक ऊर्जा के वैज्ञानिक पहलुओं पर कार्य प्रारंभ किया। इसी क्रम में पारद शिवलिंग निर्माण का विचार साकार हुआ।
उन्होंने बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि ध्यान, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक अनुसंधान के लिए एक वैश्विक केंद्र विकसित करना भी है।
रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुआ नाम
अपने विशाल आकार और विशेष निर्माण तकनीक के कारण इस पारद ध्यान लिंगम को पहले ही इंडिया वर्ल्ड रिकॉर्ड और एशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिल चुका है। इसके साथ ही इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल कराने की प्रक्रिया भी जारी है। आयोजकों का दावा है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग है।
विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी में होगा आयोजन
प्राण प्रतिष्ठा समारोह में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित राजनीतिक, प्रशासनिक, आध्यात्मिक और कॉर्पोरेट जगत की अनेक प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की संभावना है। आयोजन समिति के अनुसार यह कार्यक्रम राज्य के महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में से एक होगा।
विश्व शांति और आध्यात्मिक चेतना का संदेश
आयोजकों का कहना है कि पारद शिवलिंग की स्थापना का उद्देश्य विश्व शांति, मानव कल्याण और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देना है। मान्यता है कि पारद से निर्मित शिवलिंग ध्यान और सकारात्मक ऊर्जा का विशेष केंद्र माना जाता है। इसी भावना के साथ इसे श्रद्धालुओं और साधकों के लिए समर्पित किया जा रहा है।
फैक्ट फाइल
- स्थान: श्री साई शिव गंगा धाम, हरिद्वार
- प्राण प्रतिष्ठा तिथि: 17 जून
- कुल वजन: लगभग 5210 किलोग्राम
- शुद्ध पारे की मात्रा: 3333 किलोग्राम
- ऊंचाई: 4.5 फीट
- गोलाई: 1.5 फीट
- निर्माण अवधि: लगभग 10 वर्ष
- उपलब्धियां: इंडिया वर्ल्ड रिकॉर्ड और एशिया वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज
- उद्देश्य: विश्व शांति, ध्यान और आध्यात्मिक अनुसंधान को बढ़ावा देना
यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि हरिद्वार को आध्यात्मिक पर्यटन और ध्यान साधना के एक नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

