14 june 2026
देहरादून। उत्तराखंड सरकार की महत्वाकांक्षी पहल ‘देवभूमि परिवार आईडी’ को अब कानूनी आधार मिल गया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद देवभूमि परिवार अधिनियम-2026 पूरे राज्य में लागू हो गया है। इस कानून के तहत राज्य में पिछले 15 वर्षों या उससे अधिक समय से निवास कर रहे परिवारों का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा और प्रत्येक पात्र परिवार को एक विशिष्ट देवभूमि परिवार आईडी प्रदान की जाएगी।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से विभिन्न विभागों में बिखरे हुए लाभार्थी डेटा को एक मंच पर लाया जा सकेगा। अभी तक अलग-अलग योजनाओं के लिए अलग डेटाबेस होने के कारण सत्यापन में समय लगता था और कई बार एक ही व्यक्ति का डेटा कई जगह दर्ज होने से प्रशासनिक कठिनाइयां पैदा होती थीं। नई व्यवस्था इन समस्याओं को कम करने में मदद करेगी।
क्या है देवभूमि परिवार आईडी?
देवभूमि परिवार आईडी एक यूनिक पहचान संख्या होगी, जो परिवार की सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक जानकारी को एकीकृत रूप से जोड़ने का कार्य करेगी। इसके माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक अधिक पारदर्शिता और तेजी से पहुंचाने का दावा किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी लाभार्थियों की पहचान भी आसान होगी और सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।
किन लोगों को मिलेगा लाभ?
अधिनियम के अनुसार केवल वही व्यक्ति या परिवार इस व्यवस्था का हिस्सा माना जाएगा जो उत्तराखंड में लगातार 15 वर्ष या उससे अधिक समय से निवास कर रहा हो। राज्य सरकार तथा स्थानीय निकायों के स्थायी कर्मचारियों और उनके परिवारों को भी इसमें शामिल किया गया है, भले ही वे किसी कारणवश राज्य से बाहर कार्यरत हों।
हालांकि केवल शिक्षा, अस्थायी रोजगार या सीमित अवधि की नियुक्ति के आधार पर राज्य में रहने वाले लोगों को इस कानून के तहत स्थायी निवासी का दर्जा नहीं मिलेगा।
परिवार की महिला होगी मुखिया
इस कानून की एक विशेष व्यवस्था यह भी है कि परिवार की 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की सबसे वरिष्ठ महिला को परिवार का मुखिया माना जाएगा। यदि किसी परिवार में वयस्क महिला उपलब्ध नहीं है तो सबसे वरिष्ठ पुरुष सदस्य अस्थायी रूप से यह जिम्मेदारी निभाएगा। परिवार की किसी महिला सदस्य के वयस्क होने पर मुखियापन स्वतः उसके नाम पर स्थानांतरित हो जाएगा।
बनेगा केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस
राज्य सरकार सभी पात्र परिवारों का एक केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करेगी। यह डेटा विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायक होगा। इसके लिए एक विशेष देवभूमि परिवार प्राधिकरण का गठन भी किया जाएगा, जो पूरी व्यवस्था की निगरानी और संचालन करेगा।
डेटा सुरक्षा के लिए सख्त प्रावधान
कानून में नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। बिना अनुमति डेटाबेस में प्रवेश करने, डेटा से छेड़छाड़ करने, वायरस डालने या जानकारी नष्ट करने जैसे अपराधों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इसके अलावा किसी अन्य व्यक्ति की पहचान का दुरुपयोग कर गलत जानकारी देने, फर्जी आईडी बनाने या अनधिकृत रूप से नागरिकों का डेटा एकत्र करने वालों के लिए भी जेल और आर्थिक दंड की व्यवस्था की गई है।
सरकार की क्या है मंशा?
राज्य सरकार का दावा है कि देवभूमि परिवार आईडी भविष्य में सरकारी सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं के लिए एक भरोसेमंद आधार बनेगी। इससे लाभार्थियों की पहचान आसान होगी, योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी धन के दुरुपयोग पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डेटा सुरक्षा और गोपनीयता के मानकों का सख्ती से पालन किया गया, तो यह पहल उत्तराखंड में डिजिटल प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

