11 june 2026
देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में गुरुवार को आयोजित कमांडेंट परेड अनुशासन, समर्पण और सैन्य गौरव का शानदार उदाहरण बनकर सामने आई। मौसम की चुनौती के बावजूद कैडेटों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। हल्की बारिश के बीच ड्रिल स्क्वायर पर सैकड़ों कैडेटों ने एकसमान कदमताल कर अपनी उत्कृष्ट तैयारी और सैन्य दक्षता का प्रदर्शन किया। परेड के दौरान पूरे परिसर में जोश और गर्व का माहौल बना रहा।
परेड की सलामी आईएमए के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल नागेंद्र सिंह ने ली। निरीक्षण के बाद उन्होंने कैडेटों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय सेना की प्रतिष्ठा और परंपराओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब इन युवा अधिकारियों के कंधों पर होगी। उन्होंने कहा कि एक सैन्य अधिकारी की पहचान केवल उसकी वर्दी से नहीं, बल्कि उसके चरित्र, साहस, प्रतिबद्धता और मानवीय संवेदनाओं से होती है।
उन्होंने कहा कि आईएमए केवल सैन्य प्रशिक्षण का संस्थान नहीं है, बल्कि यह ऐसे नेताओं का निर्माण करता है जो कठिन परिस्थितियों में भी सही निर्णय लेने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कैडेटों से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
महिला कैडेटों का पहला बैच बनेगा इतिहास का हिस्सा
इस बार की कमांडेंट परेड कई मायनों में ऐतिहासिक रही। पहली बार महिला कैडेटों का एक बैच पासिंग आउट की दहलीज पर पहुंचा है। लेफ्टिनेंट जनरल नागेंद्र सिंह ने इसे भारतीय सैन्य इतिहास का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि यह सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और समान अवसरों की दिशा में एक बड़ा कदम है।
उन्होंने कहा कि महिला कैडेटों ने प्रशिक्षण के दौरान अपनी प्रतिभा, दृढ़ता और नेतृत्व क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों की युवतियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और सेना में महिलाओं की भूमिका को और मजबूत करेगी।
विदेशी कैडेटों ने बढ़ाया अकादमी का गौरव
कमांडेंट ने आईएमए में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विदेशी कैडेटों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि विभिन्न मित्र देशों से आए कैडेटों ने न केवल प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, बल्कि भारत और अपने देशों के बीच मित्रता के मजबूत संबंध भी स्थापित किए हैं।
उनके अनुसार, सैन्य प्रशिक्षण के दौरान विकसित यह आपसी विश्वास और सहयोग भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर सामरिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूती प्रदान करेगा। विदेशी कैडेट आईएमए की वैश्विक प्रतिष्ठा को भी नई पहचान दे रहे हैं।
भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार युवा अधिकारी
अपने संबोधन में लेफ्टिनेंट जनरल नागेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान समय तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों का दौर है। ऐसे में सैन्य अधिकारियों के सामने पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ नई तकनीकी और रणनीतिक चुनौतियां भी होंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि आईएमए में विकसित अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और कर्तव्यनिष्ठा युवा अधिकारियों को हर चुनौती का सफलतापूर्वक सामना करने में सक्षम बनाएगी।
उन्होंने कहा कि सेना का अधिकारी केवल युद्धक्षेत्र में ही नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन, मानवीय सहायता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मोर्चों पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पुष्पवर्षा के साथ भावुक हुआ समापन
परेड के अंत में जब कैडेटों ने परंपरा के अनुसार ‘अंतिम पग’ की ओर कदम बढ़ाए, तो वातावरण भावुक और गौरवपूर्ण हो उठा। हेलीकॉप्टरों से हुई पुष्पवर्षा ने इस ऐतिहासिक क्षण को और यादगार बना दिया। फूलों की वर्षा के बीच कैडेटों के चेहरे पर उपलब्धि, आत्मविश्वास और राष्ट्रसेवा का संकल्प स्पष्ट दिखाई दे रहा था।
समारोह के अंत में कमांडेंट ने सभी ऑफिसर कैडेटों को कठिन प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने पर बधाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि ये युवा अधिकारी अपने निस्वार्थ आचरण, उत्कृष्ट नेतृत्व और कर्तव्यनिष्ठा से भारतीय सेना, अपने परिवारों और पूरे देश का नाम रोशन करेंगे।
आईएमए की यह कमांडेंट परेड केवल एक सैन्य परंपरा नहीं, बल्कि उन सपनों, संघर्षों और संकल्पों का उत्सव थी, जो देश की रक्षा के लिए समर्पित नई पीढ़ी के सैन्य अधिकारियों को नई जिम्मेदारियों की ओर अग्रसर कर रही है।

