21 may 2026
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक अहम हलफनामे में कहा है कि उत्तराखंड के अलकनंदा और भागीरथी नदी बेसिन में अब कोई नई पनबिजली परियोजना शुरू नहीं की जाएगी। सरकार ने अदालत को बताया कि हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील पारिस्थितिकी, लगातार बढ़ते भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और ग्लेशियल झीलों के खतरे को देखते हुए नए हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर्यावरण के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं।
केंद्र ने अपने हलफनामे में साफ किया कि केवल सात पुरानी या निर्माणाधीन परियोजनाओं को ही आगे बढ़ाने की अनुमति दी जा सकती है। इनमें टिहरी स्टेज-II, तपोवन विष्णुगढ़, विष्णुगढ़ पिपलकोटी, सिंगोली भटवारी, फाटा ब्यूंग, मध्यमहेश्वर और कैलगंगा-II जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें से कई परियोजनाएं चालू हो चुकी हैं, जबकि कुछ अंतिम चरण में हैं।
सरकार ने यह भी माना कि जलविद्युत परियोजनाएं स्वच्छ ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत हैं, लेकिन गंगा के ऊपरी बेसिन का पर्यावरणीय और धार्मिक महत्व किसी सामान्य नदी क्षेत्र जैसा नहीं है। हलफनामे में कहा गया कि अलकनंदा-भागीरथी क्षेत्र देश की सांस्कृतिक पहचान और करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है, इसलिए यहां विकास परियोजनाओं पर विशेष सावधानी जरूरी है।
यह मामला वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद शुरू हुई न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है। उस त्रासदी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड में पनबिजली परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभावों की समीक्षा के निर्देश दिए थे। अब केंद्र सरकार ने अदालत के सामने अपना अंतिम रुख रखते हुए संकेत दिया है कि गंगा की ऊपरी धारा में पर्यावरण संरक्षण को विकास से ऊपर प्राथमिकता दी जाएगी।

