20 may 2026
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर टोल वसूली शुरू होने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत क्षेत्र में यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां दिल्ली और उत्तराखंड की ओर जाने वाले भारी और हल्के वाहनों का दबाव स्थानीय मार्गों पर लगातार बढ़ता जा रहा था, वहीं अब प्रतिदिन करीब पांच हजार वाहन कम हो गए हैं। इसका सीधा असर शहर और ग्रामीण संपर्क मार्गों पर दिखाई दे रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार पहले दिनभर मुख्य सड़कों पर जाम जैसी स्थिति बनी रहती थी। खासकर सुबह और शाम के समय बागपत, खेकड़ा और आसपास के इलाकों में वाहनों की लंबी कतारें आम बात थीं। लेकिन टोल लागू होने के बाद कई वाहन चालकों ने वैकल्पिक मार्गों का उपयोग कम कर दिया है और अब वे निर्धारित एक्सप्रेस रूट से ही सफर कर रहे हैं। इससे स्थानीय मार्गों पर दबाव घटा है।
यातायात विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि वाहनों की संख्या घटने के साथ-साथ ओवरस्पीडिंग की घटनाओं में भी कमी आई है। पहले स्थानीय सड़कों का इस्तेमाल तेज रफ्तार से गुजरने वाले बाहरी वाहन अधिक करते थे, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता था। अब यातायात नियंत्रित होने से लोगों को राहत महसूस हो रही है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बाजार आने-जाने वाले व्यापारियों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित माहौल मिल रहा है।
व्यापारिक गतिविधियों पर भी इसका मिला-जुला असर देखा जा रहा है। कुछ ढाबा और सड़क किनारे व्यवसाय करने वाले लोगों का कहना है कि वाहनों की संख्या कम होने से ग्राहकों में थोड़ी कमी आई है, जबकि स्थानीय नागरिकों का मानना है कि ट्रैफिक कम होने से जीवन आसान हुआ है। प्रशासन का दावा है कि आने वाले समय में कॉरिडोर के आसपास बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी काम किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का प्रभाव केवल यात्रा समय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे आसपास के शहरों की यातायात व्यवस्था, व्यापार और पर्यावरण पर भी असर पड़ता है। बागपत क्षेत्र में फिलहाल इसका सबसे बड़ा फायदा ट्रैफिक दबाव कम होने के रूप में सामने आया है।

